Tuesday, May 27, 2025

ममतामयी माता रमाबाई अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर दी गई उन्हें विनम्र आदरांजलि

 ममतामयी माता रमाबाई अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन भारतीय बौद्ध महासभा जिला महेंद्रगढ़ की इकाई के तत्वावधान में नारनौल में किया गया । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माता रमाबाई के त्याग ,बलिदान ,करूणा ,ममता के संदेश को जन जन तक पहुंचाना था । कार्यक्रम की शुरुआत पँचशील के दीप प्रज्वलित करके की गई । इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इस कार्यक्रम का संचालन महिला शक्ति द्वारा किया गया । 

भारतीय बौद्ध महासभा हरियाणा राज्य की उपाध्यक्ष माननीया आशा बुद्धवंशी ने माता रमाबाई अम्बेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा साहब हमारे लिए इतना कुछ कर पाए ,उसका श्रेय माता रमाई को जाता है । उन्होंने बाबा साहब को कभी भी टूटने नही दिया । यहां तक कि बाबा साहब को जब भी जरूरत पड़ी उन्होंने पैसे भी भिजवाए । उनको आज हम सादर नमन करते हैं ।

राष्ट्रपति अवार्डी पूर्व सरपंच माननीया रोशनी जी , जो वर्तमान में जिला इकाई की उपप्रधान हैं , ने माता रमाई को आदरांजलि प्रस्तुति करते हुए बताया कि माता रमाबाई के बलिदान के बदले ही बहुजन समाज व नारी वर्ग आज शानदार तरीके से जीवन जी रहे हैं । अपने बच्चों की कुर्बानी देकर माता रमाई ने इस देश के भविष्य को सँवारा है । आज हर क्षेत्र में महिलायें पुरुषों को पछाड़ रही है जिसका श्रेय भारत के संविधान को जाता है । संविधान में बाबा साहब ने देश की आधी आबादी को जो हक व अधिकार दिए हैं उन्ही की बदौलत आज भारत की नारी आसमान छू रही हैं । 

जिला इकाई की महामंत्री माननीया केला बुद्धवंशी ने माता रमाई के परिनिर्वाण दिवस पर अपनी आदरांजलि प्रस्तुत करते हुए बताया कि आज समाज में बहुजन तबके ने अपनी शानदार स्थिति बनाई है तो बाबा साहब के उस कथन की वजह से ही जिसमें बाबा साहब कहते हैं कि रमा ! तेरा राजरत्न देश का शासक बनेगा । बाबा साहब ने वंचित तबके को देश के संसद भवन तक पहुंचने का अवसर संविधान के जरिए दिया है। आज हमें माता रमाई के त्याग व बलिदान को याद करके अगली पीढ़ी को समझाना है । अपने इतिहास को जानकर ही हमारा समाज नए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकता है । 

भारतीय बौद्ध महासभा जिला इकाई महेंद्रगढ़ की कोषाध्यक्ष नीतू अम्बेडकर ने सभी बुद्धवंशी आगुन्तकों का साधुवाद व्यक्त करते हुए बताया कि हमारे साथी आज के दिन को बहुत ही दुःख व वेदना के रूप में मनाते हैं , जबकि हमारे बाबा साहब अम्बेडकर आज के युग के बोधिसत्त्व ही हैं । बुद्ध के सिद्धांतों में - जीवन मे दुःख हैं जिनका एक कारण है । साथ ही निवारण भी है ,जिसकी राह बोधिसत्त्व दिखाते व समझाते हैं । इस हिसाब से देखें तो हम आज के दिन को परिनिर्वाण दिवस के रूप में यह सोचकर मनाएं कि यह अंतिम दिन था जब हमारी माता रमाबाई हमारे बीच इस संसार मे मौजूद थी । अतः यह खुशी का दिन है , वो अंतिम दिन जिस दिन हमारी माता रमाई हमारे साथ थी ,वो आज है । इस सोच से हम दुःख से मुक्ति पाएंगे , यही एक बोधिसत्त्व का सफल संदेश भी होगा । तो इस दिन की याद से हमें दुःख नही घेरेगा । 

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं व श्रोताओं का आभार व्यक्त किया गया । इस कार्यक्रम में लालसिंह , नेहा , सुनील , साहिल ,असुरेंद्र अम्बेडकर आदि मौजूद रहे । 


























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