Friday, December 27, 2024

बाबा साहेब अम्बेडकर के प्रति घटिया टिप्पणी करने पर भीमसैनिकों ने किया रोष प्रदर्शन

 बाबा साहेब अम्बेडकर के प्रति घटिया टिप्पणी करने पर भीमसैनिकों ने किया रोष प्रदर्शन 

गृहमंत्री अमित शाह द्वारा डॉ अम्बेडकर के प्रति अभद्र व अवांछनीय टिप्पणी करने का है मामला 














22 दिसम्बर 

भारत के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा भारतरत्न डॉ भीमराव अम्बेडकर के प्रति घटिया टिप्पणी करने के कारण विभिन्न संगठनों ने महेंद्रगढ़ रोड नारनौल स्थित बाबा साहेब प्रतिमा स्थल पर बैठक कर रोष प्रदर्शन किया । इसमें शामिल सभी संस्थाओं व समितियों ने हस्ताक्षरयुक्त पत्र राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को लिखकर ऐसी घटिया टिप्पणी करने पर गृहमंत्री को पद से हटाने व देश से माफी मांगने की मांग की गई। रोष प्रदर्शन बैठक की अध्यक्षता सर्व अजा संघर्ष समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था दिल्ली के प्रमुख सलाहकार बिरदी चंद गोठवाल ने की तथा मंच संचालन असुरेंद्र अम्बेडकर ने किया। इस रोष प्रदर्शन में भारतीय बौद्ध महासभा जिला महेंद्रगढ़, गुड मॉर्निंग इंडिया @दीपक मनास, सामाजिक विकास पथ समिति, डॉ भीमराव अंबेडकर नवयुवक मंडल पटीकरा, दलित वर्ग कल्याण सभा पुरानी मंडी नारनौल, द बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया गाँव टहला, डॉ अंबेडकर जागृति मंच अमरपुर जौरासी एवं समस्त अम्बेडकरवादी संगठन शामिल रहे । इस रोष प्रदर्शन में सर्व अजा संघर्ष समिति के प्रधान चन्दन सिंह जालवान, अखिल भारतीय आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष लालाराम नाहर, समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था दिल्ली के प्रमुख सलाहकार बिरदी चंद गोठवाल, बहन प्रेम यादव , राष्ट्रपति अवार्डी पूर्व सरपंच रोशनी देवी  , दीपक मनास, मनजीत, साहित्यकार भूपसिंह भारती, महेश श्रेष्ठ, दलबीर सिंह बाछोद ने अपने विचार रखे तथा अपना रोष जाहिर करते हुए कहा कि देश के गृहमंत्री को अपना इस्तीफा देकर बाबा साहेब के फॉलोवर्स से माफी मांगनी चाहिए । दुनिया जिन्हें ज्ञान का सूरज कहती है, दुनिया के बौद्ध राष्ट्र जिन्हें बोधिसत्व कहते हैं, उन पर टिप्पणी करना न केवल मूर्खतापूर्ण है बल्कि यह एक पागलपन है । 32 डिग्री तथा 9 भाषाओं के ज्ञाता डॉ अम्बेडकर की प्रतिमाएं 27 देशों में सुशोभित हैं, चीन जैसे देश मे बाबा साहब की 100 मीटर ऊंची प्रतिमा बन रही है  । कई देशों के विश्वविद्यालयों में बाबा साहब की लिखी पुस्तकों पर शोध हो रहे हैं । 

बाबा साहब के संघर्ष व देन के बारे में जितना लिखा जाए, बोला जाए कम पड़ता है ।

प्रदर्शन में गुरु रविदास महासभा के प्रधान बलबीर सिंह बबेरवाल, नवनीत, नीतू अम्बेडकर, नरेश, आदर्श, अनूप,  यादवेंद्र, सन्दीप, देशराज, हरीश, राहुल, शशिकांत अम्बेडकर, एडवोकेट सुनील खोवाल, मनोज, पवन , प्रमोद, हवासिंह, जोरावर सिंह, रोहताश , सरताज, नितिन, हजारीलाल खटावला, रविकुमार, करण सिंह, जीतू समेत अनेक भीमसैनिक उपस्थित रहे ।











मनुस्मृति दहन दिवस के साथ जगाई जागृति की अलख

 नारनौल (25 दिसम्बर 2024) - दलित वर्ग कल्याण सभा पुरानी मंडी नारनौल की अगुवाई में आज डॉ अम्बेडकर भवन , मोहल्ला पुरानी मंडी नारनौल में मनुस्मृति दहन दिवस मनाया गया । इस बैठक में क्षेत्र के बुद्धिजीवी तथा अम्बेडकरवादी विचारकों ने हिस्सा लिया । कार्यक्रम में मंच का संचालन मंजीत अम्बेडकर ने किया । भारतीय बौद्ध महासभा राज्य इकाई से आशा पूनिया ने 25 दिसम्बर 1927 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जो पुस्तक देश के बहुजनों के खिलाफ हो ,उसका जला देना ही बनता है ।

सामाजिक विकास पथ समिति प्रमुख माननीया प्रेम यादव ने नारी को गुलाम बनाने वाली किताब की भर्त्सना करते हुए कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर जो शिक्षा व किताबों के पक्षधर थे ,ने इस किताब को सिर्फ इसलिए जलाया क्योंकि यह अमानवीय व्यवहार सिखाती है । 

आज महिलाओं को संविधान के चलते शिक्षा मिलने लगी है , मान सम्मान मिलने लगा है ,तो हमें यह भी समझना चाहिए कि संविधान से पहले मनुस्मृति ने हमारा कितना नुकसान किया था । गुड मॉर्निंग इंडिया के प्रमुख दीपक मनास ने बाबा साहब के विचारों से रूबरू कराते हुए कहा कि महाड़ आंदोलन तथा कालाराम मंदिर प्रवेश करके बाबा साहब हमें पूजा पाठ नही सिखाते बल्कि हमें सामाजिक हक यानि बराबरी का हक हासिल करना सिखाते हैं । माननीय मदनलाल डाढैया ने आज के युग में अम्बेडकरवाद के  बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि हमें बाबा साहेब को पढ़कर उनके विचारों को अपने जीवन में ढालना चाहिए । 

प्रख्यात कवि व कुण्डली-कार भूपसिंह भारती ने अपनी कुंडलियों के माध्यम से संविधान निर्माता के साथ साथ कानून मंत्री के रूप में बाबा साहब की राष्ट्र को देन पर प्रकाश डाला । संसद में देश के गृहमंत्री द्वारा की गई भाषा पर अपना विरोध प्रकट करते हुए माननीय प्यारेलाल चमन ने बताया कि आज भी कुछ लोग मनुस्मृति को सिर पर ढोकर घूम रहे हैं ,जबकि उन्हें सब कुछ संविधान की बदौलत मिला है । असुरेंद्र अम्बेडकर ने बताया कि भारत से बाहर दुनिया की नौ सर्वोच्च विश्वविद्यालयों में बाबा साहब की प्रतिमा लगी हुई है ,जो दर्शाती हैं कि ज्ञान के मामले में बुद्ध के बाद दुनिया सबसे बड़ा सम्मान बाबा साहब को देती हैं ।

बैठक को सरताज अम्बेडकर ,अंकिता तथा हरीश ने भी सम्बोधित किया । इस कार्यक्रम में डॉ अम्बेडकर नवयुवक मंडल पटीकरा , द बुद्धिस्ट सोसायटी। ऑफ इंडिया  टहला , अम्बेडकर जागृति मंच जोरासी जैसे संगठनो से जुड़े पदाधिकारी गण तथा अन्य प्रबुद्धजन माननीय हनुमान सिंह ,जयसिंह नारनौलिया ,नीतू अम्बेडकर ,रोहताश , रविकुमार , नितिन ,मनोज अम्बेडकर ,गंगाराम , कर्णसिंह , आशीष ,चेतन ,शशिकांत अम्बेडकर , चंपारानी , प्रमोद , मनोज ,हवासिंह ,आदर्श , चेतन ,मनजीत , हर्ष , मनीषा , फूला देवी , राजबाला , सन्तोष , कनिष्क आदि भीमसैनिक उपस्थित रहे ।













पटीकरा में भारतीय बौद्ध महासभा के सहयोग से मनाया गया बौद्ध जागरूकता कार्यक्रम

नारनौल खण्ड के पटीकरा गांव में डॉ भीमराव अंबेडकर नवयुवक मंडल पटीकरा के बैनर तले एक सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम ...