नारनौल (25 दिसम्बर 2024) - दलित वर्ग कल्याण सभा पुरानी मंडी नारनौल की अगुवाई में आज डॉ अम्बेडकर भवन , मोहल्ला पुरानी मंडी नारनौल में मनुस्मृति दहन दिवस मनाया गया । इस बैठक में क्षेत्र के बुद्धिजीवी तथा अम्बेडकरवादी विचारकों ने हिस्सा लिया । कार्यक्रम में मंच का संचालन मंजीत अम्बेडकर ने किया । भारतीय बौद्ध महासभा राज्य इकाई से आशा पूनिया ने 25 दिसम्बर 1927 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जो पुस्तक देश के बहुजनों के खिलाफ हो ,उसका जला देना ही बनता है ।
सामाजिक विकास पथ समिति प्रमुख माननीया प्रेम यादव ने नारी को गुलाम बनाने वाली किताब की भर्त्सना करते हुए कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर जो शिक्षा व किताबों के पक्षधर थे ,ने इस किताब को सिर्फ इसलिए जलाया क्योंकि यह अमानवीय व्यवहार सिखाती है ।
आज महिलाओं को संविधान के चलते शिक्षा मिलने लगी है , मान सम्मान मिलने लगा है ,तो हमें यह भी समझना चाहिए कि संविधान से पहले मनुस्मृति ने हमारा कितना नुकसान किया था । गुड मॉर्निंग इंडिया के प्रमुख दीपक मनास ने बाबा साहब के विचारों से रूबरू कराते हुए कहा कि महाड़ आंदोलन तथा कालाराम मंदिर प्रवेश करके बाबा साहब हमें पूजा पाठ नही सिखाते बल्कि हमें सामाजिक हक यानि बराबरी का हक हासिल करना सिखाते हैं । माननीय मदनलाल डाढैया ने आज के युग में अम्बेडकरवाद के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि हमें बाबा साहेब को पढ़कर उनके विचारों को अपने जीवन में ढालना चाहिए ।
प्रख्यात कवि व कुण्डली-कार भूपसिंह भारती ने अपनी कुंडलियों के माध्यम से संविधान निर्माता के साथ साथ कानून मंत्री के रूप में बाबा साहब की राष्ट्र को देन पर प्रकाश डाला । संसद में देश के गृहमंत्री द्वारा की गई भाषा पर अपना विरोध प्रकट करते हुए माननीय प्यारेलाल चमन ने बताया कि आज भी कुछ लोग मनुस्मृति को सिर पर ढोकर घूम रहे हैं ,जबकि उन्हें सब कुछ संविधान की बदौलत मिला है । असुरेंद्र अम्बेडकर ने बताया कि भारत से बाहर दुनिया की नौ सर्वोच्च विश्वविद्यालयों में बाबा साहब की प्रतिमा लगी हुई है ,जो दर्शाती हैं कि ज्ञान के मामले में बुद्ध के बाद दुनिया सबसे बड़ा सम्मान बाबा साहब को देती हैं ।
बैठक को सरताज अम्बेडकर ,अंकिता तथा हरीश ने भी सम्बोधित किया । इस कार्यक्रम में डॉ अम्बेडकर नवयुवक मंडल पटीकरा , द बुद्धिस्ट सोसायटी। ऑफ इंडिया टहला , अम्बेडकर जागृति मंच जोरासी जैसे संगठनो से जुड़े पदाधिकारी गण तथा अन्य प्रबुद्धजन माननीय हनुमान सिंह ,जयसिंह नारनौलिया ,नीतू अम्बेडकर ,रोहताश , रविकुमार , नितिन ,मनोज अम्बेडकर ,गंगाराम , कर्णसिंह , आशीष ,चेतन ,शशिकांत अम्बेडकर , चंपारानी , प्रमोद , मनोज ,हवासिंह ,आदर्श , चेतन ,मनजीत , हर्ष , मनीषा , फूला देवी , राजबाला , सन्तोष , कनिष्क आदि भीमसैनिक उपस्थित रहे ।











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