Monday, April 7, 2025

भारतीय बौद्ध महासभा की हरियाणा इकाई का गठन , जयशील बौद्ध बने अध्यक्ष

 रोहतक : 6 अप्रैल 2025 

 द बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (BSI) भारतीय बौद्ध महासभा कार्यालय मुम्बई के नेतृत्व में हरियाणा राज्य की इकाई का गठन रविवार को सम्राट असोक के जन्मोत्सव के मंगलमयी अवसर पर रोहतक के डॉ आंबेडकर स्कूल में किया गया । इस अवसर पर हरियाणा के प्रत्येक जिले से अम्बेडकरवादी व बुद्धिष्ट लोगों ने भाग लिया । सर्वसम्मति से अध्यक्ष पद के लिए बौद्धाचार्य जयशील (जे के जोशीवाल) को चुना गया । इस विशेष कार्यक्रम में बी एस आई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट एस के भंडारे , राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उत्तर भारत कपूर सिंह सिंघल, राष्ट्रीय संगठक आर एस गौतम, राष्ट्रीय संगठक फ़ौजी इंडिया मौजूद रहे । बैठक में प्रियदर्शी सम्राट असोक के जीवन पर परिचर्चा की गई । पिछले सत्र के खर्च व आय का विवरण संदेश मोहिते ने प्रस्तुत किया । सर्वसम्मति से निम्नलिखित भीमसैनिको को महासभा की जिम्मेदारी दी गयी -

अध्यक्ष - जयशील बौद्ध (जगदीश कुमार)

महामंत्री- संदेश अशोक मोहिते

उपाध्यक्ष - रणधीर सिंह

उपाध्यक्ष (महिला) - आशा पूनिया

उपाध्यक्ष (पर्यटन विभाग ) - सुभाष चंद्र

उपाध्यक्ष (संरक्षण ए एस डी ) - विरेन्द्र बौद्ध

सचिव (संस्कार) - असुरेंद्र अम्बेडकर  

सचिव (पर्यटन प्रचार ) - सत्यवीर सिंह बडगूज्जर

सचिव (पर्यटन प्रचार ) - अमरजीत बौद्ध

संगठक सोनीपत - योगेंद्र

संगठक हिसार - सन्दीप बौद्ध 

संगठक रोहतक - हर्षवर्धन हनुमान बौद्ध 

संगठक भिवानी - कमलजीत 

बैठक को सम्बोधित करते हुए एस के भंडारे ने बताया कि भारत में बौद्ध विरासत के असली मालिक जाग रहे हैं । बोधगया स्थल पर आज भले ही संख्या कम है , मगर यह शुरुआत है । बहुत जल्द भारत का एस सी एसटी ओबीसी वर्ग अपनी बौद्ध विरासत को हासिल करेगा ।

महेंद्रगढ़ से आई प्रेम यादव बुद्धवंशी ने बताया कि एस सी समाज अपने इतिहास को जानकर अपने भविष्य का निर्धारण कर रहा है लेकिन ओबीसी समाज अभी भी पाखण्ड की गिरफ्त में है । बाबा साहब के दिए अधिकारों ने उन्हें पढ़ने लिखने का हक दिया है, यह बात सबसे ज्यादा महिलाओं को समझनी व समझानी होंगी । जिस दिन महिलाएं पाखण्डमुक्त हो जाएंगी भारत फिर से विश्वगुरू कहलायेगा ।

राज्य की महिला उपाध्यक्ष आशा बौद्ध ने बताया कि घर की ज्यादातर जिम्मेदारी आज महिलाएं पूर्ण करती हैं । हर संगठन में इनकी भागीदारी बहुत जरूरी है । धम्म का कार्य महिलाओं के हाथ में आने के बाद भारत को सम्राट असोक का जम्बूदीप बनने में ज्यादा वक्त नही लगेगा । 

कार्यक्रम के अंत मे नवनिर्वाचित अध्यक्ष जयशील बौद्ध ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सब की अपेक्षाओं पर मैं खरा उतरूंगा । हम सब बाबा साहब के कारवाँ को रुकने नही देंगे ।

कार्यक्रम में खाने की व्यवस्था की गई थी जिसमें महत्वपूर्ण योगदान मिन्दन सोंगचेन निरिस्सरो का रहा । इस बैठक में उपरोक्त लोगों के अलावा रविन्द्र हिसार , नकुल तेनजिंग , कपिल गोरा, केला देवी , नीतू अम्बेडकर समेत अनेक लोग उपस्थित रहे ।

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Saturday, April 5, 2025

बच्चों को पाठ्यसामग्री बाँटकर देवानम्प्रिय प्रियदर्शी सम्राट असोक का जन्मोत्सव मनाया गया

 दुनिया के 33 प्रतिशत भू-भाग पर बौद्ध धम्म की पताका फहराने वाले 'सम्राटों के सम्राट' , चक्रवर्ती सम्राट असोक का जन्मोत्सव आज सिंघाना रोड नारनौल स्थित झुग्गियों में प्यारे प्यारे बच्चों के साथ मनाया गया ।



इस कार्यक्रम में भारत के स्वर्णिम इतिहास से बच्चों को अवगत करवाया गया । कार्यक्रम की शुरुआत में आशा पूनिया ने बताया कि सम्राट असोक भारत के बहुत बड़े राजा हुए हैं जिन्होंने विदेशों पर भी जीत पाई । उनसे बड़ा साम्राज्य सिकंदर का भी नही था । इतिहास में पहला पशु चिकित्सालय असोक काल में ही देखने को मिलता है । यह उनके करूणामयी व्यक्तित्व की झलक है ।







केला देवी ने असोक जन्मोत्सव की बधाई देते हुए कहा कि सड़कों के दोनों तरफ छायादार पेड़ों की शुरूवात असोक राज से ही होती है । उन्होंने म्यंमार से लेकर ईरान तक सीधी सड़क बनवाई ,जो यह दर्शाता है कि उनका साम्राज्य कितना विशाल रहा होगा । उनका 'सिंह-स्तम्भ' राष्ट्रीय मुद्रा पर अंकित है तथा  'अशोक चक्र' भारत के राष्ट्रध्वज की शोभा बढ़ाता है ।






प्रेम यादव ने असोक काल का चित्रण करते हुए बताया कि अपने बेटे महिंद तथा बेटी संघमित्ता को धम्म की पताका देकर सिरीलंका (श्रीलंका) भेजकर उन्होंने तथागत बुद्ध का धम्म विदेशों तक पहुंचाया । उन्होंने 84000 स्तूपों का निर्माण कराया जो धम्म व बुद्ध को आज की पीढ़ी तक लेकर आते हैं ।





कार्यक्रम के अंत में असुरेंद्र अम्बेडकर ने सम्राट असोक के अन्य कार्यों के बारे में बताते हुए कहा कि सबसे पहला सरकारी स्कूल असोक काल मे बनाया गया । भारत का असली इतिहास शायद ही हमें मिल पाता यदि सम्राट असोक के शिलालेख नही मिलते । विदेशी शोधकर्ताओं ने पाखंडयुक्त कूड़े कचरे को हटाकर हमें अपने असली इतिहास से रूबरू कराया । यह सब अंग्रेजी शासन के दौरान ही हो सका ।










कार्यक्रम के अंत में बच्चों को शैक्षिक सामग्री वितरित की गई तथा महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की बात समझाई गयी । 

पटीकरा में भारतीय बौद्ध महासभा के सहयोग से मनाया गया बौद्ध जागरूकता कार्यक्रम

नारनौल खण्ड के पटीकरा गांव में डॉ भीमराव अंबेडकर नवयुवक मंडल पटीकरा के बैनर तले एक सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम ...