Saturday, April 5, 2025

बच्चों को पाठ्यसामग्री बाँटकर देवानम्प्रिय प्रियदर्शी सम्राट असोक का जन्मोत्सव मनाया गया

 दुनिया के 33 प्रतिशत भू-भाग पर बौद्ध धम्म की पताका फहराने वाले 'सम्राटों के सम्राट' , चक्रवर्ती सम्राट असोक का जन्मोत्सव आज सिंघाना रोड नारनौल स्थित झुग्गियों में प्यारे प्यारे बच्चों के साथ मनाया गया ।



इस कार्यक्रम में भारत के स्वर्णिम इतिहास से बच्चों को अवगत करवाया गया । कार्यक्रम की शुरुआत में आशा पूनिया ने बताया कि सम्राट असोक भारत के बहुत बड़े राजा हुए हैं जिन्होंने विदेशों पर भी जीत पाई । उनसे बड़ा साम्राज्य सिकंदर का भी नही था । इतिहास में पहला पशु चिकित्सालय असोक काल में ही देखने को मिलता है । यह उनके करूणामयी व्यक्तित्व की झलक है ।







केला देवी ने असोक जन्मोत्सव की बधाई देते हुए कहा कि सड़कों के दोनों तरफ छायादार पेड़ों की शुरूवात असोक राज से ही होती है । उन्होंने म्यंमार से लेकर ईरान तक सीधी सड़क बनवाई ,जो यह दर्शाता है कि उनका साम्राज्य कितना विशाल रहा होगा । उनका 'सिंह-स्तम्भ' राष्ट्रीय मुद्रा पर अंकित है तथा  'अशोक चक्र' भारत के राष्ट्रध्वज की शोभा बढ़ाता है ।






प्रेम यादव ने असोक काल का चित्रण करते हुए बताया कि अपने बेटे महिंद तथा बेटी संघमित्ता को धम्म की पताका देकर सिरीलंका (श्रीलंका) भेजकर उन्होंने तथागत बुद्ध का धम्म विदेशों तक पहुंचाया । उन्होंने 84000 स्तूपों का निर्माण कराया जो धम्म व बुद्ध को आज की पीढ़ी तक लेकर आते हैं ।





कार्यक्रम के अंत में असुरेंद्र अम्बेडकर ने सम्राट असोक के अन्य कार्यों के बारे में बताते हुए कहा कि सबसे पहला सरकारी स्कूल असोक काल मे बनाया गया । भारत का असली इतिहास शायद ही हमें मिल पाता यदि सम्राट असोक के शिलालेख नही मिलते । विदेशी शोधकर्ताओं ने पाखंडयुक्त कूड़े कचरे को हटाकर हमें अपने असली इतिहास से रूबरू कराया । यह सब अंग्रेजी शासन के दौरान ही हो सका ।










कार्यक्रम के अंत में बच्चों को शैक्षिक सामग्री वितरित की गई तथा महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की बात समझाई गयी । 

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