नारनौल (2 फरवरी 2025)
गृहप्रवेश के मांगलिक कार्यक्रम को बौद्ध रीति से करके माननीय सतपाल यादव तथा माननीया प्रेम यादव ने समाज को नई दिशा देने का कार्य किया । कार्यक्रम को बहुत ही शांत व सुंदर तरीके से करते हुए इस तार्किक परिवार ने तथागत बुद्ध व बोधिसत्व बाबा साहब अम्बेडकर की तस्वीर लगाकर प्राचीन जम्बूद्वीप तथा लोकतांत्रिक संवैधानिक भारत की बौद्धिक विरासत पर चलने का रास्ता दिखाया है । इस कार्यक्रम में त्रिसरन ,पँचशील तथा अट्ठमंगलगाथा हेतु बौद्ध भिक्खु भंते अस्सजी मौजूद रहे । भारतीय बौद्ध महासभा जिला महेंद्रगढ़ की उपप्रधान माननीया प्रेम यादव का हमेशा यह प्रयास रहता है कि समाज में व्याप्त कुरीतियों व गलत परम्पराओं का विरोध किया जाए तथा नए तार्किक उदाहरण समाज के सामने रखे जाएं । उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए हमारे गौरवशाली इतिहास को जानने समझने के साधन बनेंगे । जनसंख्या की दृष्टि से भारत की सबसे बड़ी जाति यादव अहीर ही हैं । बुद्ध मार्ग पर इनका आगे बढ़ना ,सुजाता द्वारा तथागत को जीवन दान जैसा ही है । भारत में बुद्धवाद को पुनर्जीवित कर के उसी विरासत को भी जिंदा करने का प्रयास इसी में छिपा है।
इस कार्यक्रम में बी पी पूनिया ,रामानन्द ,पिंकी बौद्ध , अनूप बौद्ध ,अमरसिंह बौद्ध , दुर्गा प्रसाद,अजय कुमार , धर्मवीर यादव, अनिल कुमार, दिनेश शर्मा, निर्मला देवी,बिमला, ममता, अनिता, मनिपा, सुदेश, सरिता , पूजा, पिंकी, सन्तराज, चेतन, सुभाष , राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित पूर्व सरपंच रोशनी जी , भारतीय बौद्ध महासभा हरियाणा की सहसचिव आशा पूनिया , नीतू अम्बेडकर , असुरेंद्र अम्बेडकर समेत क्षेत्र के प्रबुद्धजनों की उपस्थिति रही ।

















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